शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्रदोष से मिलती है मुक्ति,जानिए भोग, मंत्र और शुभ मुहूर्त, माता शैलपुत्री की आरती

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्रदोष से मिलती है मुक्ति,जानिए भोग, मंत्र और शुभ मुहूर्त, माता शैलपुत्री की आरती

Chaitra Navratri 2020: First Navratri Maa Sahilputri Puja

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्रदोष से मिलती है मुक्ति

हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री पुकारा जाता है। मां दुर्गा का यह स्वरूप बेहद शांत, सौम्य और प्रभावशाली है। घटस्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

घट स्थापना का मुहूर्त ( शनिवार)
शुभ समय – सुबह 6:27 से 10:13 तक ( विद्यार्थियों के लिए अतिशुभ)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:44 से 12:29 तक ( सर्वजन)
स्थिर लग्न ( वृश्चिक)- प्रात: 8.45 से 11 बजे तक ( शुभ चौघड़िया, व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ)

कुछ ऐसा है मां शैलीपुत्री का स्वरूप-

मां शैलपुत्री के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल है। उनकी सवारी नंदी माने जाते हैं। देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुर्नजन्म लिया और वह फिर वह शैलपुत्री कहलाईं। ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।

माता शैलपुत्री की पूजा विधि
नवरात्रि प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना करें. फिर दुर्गा पूजा का संकल्प लें. इसके बाद माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा करें. मां को अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प आदि अर्पित करें. मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करें. फिर इसके बाद कपूर या गाय के घी से दीपक जलाएं. शंखनाद के साथ घंटी बजाएं. मां की आरती करें. मां को प्रसाद अर्पित करें. पूजा समाप्त होने के बाद घर में सभी को प्रसाद दें.

माता शैलपुत्री के मंत्र

1. शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी,

पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी,

रत्नयुक्त कल्याण कारीनी..

2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:

बीज मंत्र: ह्रीं शिवायै नम:.

3. वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ .

वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

4. प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्.

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥

त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्.

सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन.

मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

नवरात्रों में माँ शैलपुत्री की इस आरती को सुनने से सारे संकट और कष्ट दूर होते हैं

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