चावल के दाने की महिमा

एक गाँव में एक भिखारी रहता था । वह प्रतिदिन सुबह अपने घर से भीख मांगने निकल जाता था

एक गाँव में एक भिखारी रहता था । वह प्रतिदिन सुबह अपने घर से भीख मांगने निकल जाता था । उसने सोचा कि आज त्यौहार का दिन हे तो भीख थोड़ा ज्यादा मिलेगी तो उसने अपनी झोली में कुछ चावल के दाने दाल लिए और बाहर चल दिया । सामने से राजा का रथ आता दिखाई दिया तो उस भिखारी सोचा की आज तो कुछ ज्यादा भीख मिलेगी । वह अभी सोच हि रहा था कि राजा का रथ उसके पास रुक गया ।

राजा हाथ जोड़कर उस भिखारी से बोलै कि आज हमारे देश में विपत्ति आयी हुई है पंडितो ने बताया है कि अगर राजा भिखारी की तरह भीख मांगकर लाये तो उद्धार संभव है । इसलिए में तुमसे भीख मांग रहा हूँ मुझे मना मत करना क्योंकि तुम्ही पहले व्यक्ति हो जिसे मैने देखा है ।
भिखारी ने सोचा कि मैने तो कभी किसी को दान नहीं दिया और आज मुझसे भिक्षा मांगी जा रही है । भिखारी राजा को मना भी नहीं कर सकता था तो उसने अपनी झोली मे से चावल का एक दाना निकाल कर दे दिया । राजा खुश होकर आगे चल दिया ।

भिखारी ने सोचा कि मैने तो कभी किसी को दान नहीं दिया और आज मुझसे भिक्षा मांगी जा रही है । भिखारी राजा को मना भी नहीं कर सकता था तो उसने अपनी झोली मे से चावल का एक दाना निकाल कर दे दिया । राजा खुश होकर आगे चल दिया ।

शाम को भिखारी जब घर वापस आया और अपनी झोली को पलटकर देखा तो उसमे चावल का दाना सोने सोने का निकला । भिखारी रोने लगा तो उसकी पत्नी ने पूछा कि क्या बात है तो उसने सारी बात बताई । इस पर उसकी पत्नी बोली कि जो हम दान करते है वो हमारे लिए सोना है और जो धन हम इकठ्ठा करते है वह सदा के लिए मिट्टी हो जाता है । भिखारी ने भीख मांगना छोड़ दिया और मेहनत करके धन कमाने लगा ।

इस कथा का सार ये हे कि जिस मनुष्य की दान देने कि प्रवत्ति होती है उसे कभी किसी चीज़ की कमी नही होती है और जो लोग लेने की नियत रखते है उनका कभी पूरा नही पड़ता ।

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