तुलसी पूजन विधि और मंत्र

चाहे किसी राजा क घर हो या किसी गरीब का घर में तुलसी का पौधा रखना धार्मिक रूप से नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से शुभ माना जाता हे ।

प्राचीन काल से ही घर में तुलसी रखने की परंपरा चली आ रही है । चाहे किसी राजा क घर हो या किसी गरीब का घर में तुलसी का पौधा रखना धार्मिक रूप से नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से शुभ माना जाता है । शाश्त्रो में तुलसी को लक्ष्मी जी का स्वरुप और पवित्र माना जाता है । कहते हैं कि जिस घर में तुलसी होती हे वह देवी देवताओं का वास होता है ।

वैज्ञानिक तौर पर तुलसी के पौधे में जो तत्त्व बहार निकलते हैं वो घर में मच्छर और कीट पतंगों को प्रवेश नहीं करने देते हैं । तुलसी के पत्ते कई बिमारिओं में काम आते हैं । इसलिए घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है ।

तुलसी पूजा के कुछ नियम और विधि है जो सभी लोगों को पता नहीं होती हैं । जिनका हम नीचे वर्णन कर रहे हैं :
तुलसी पूजन के लिए सबसे पहले एक पूजा की प्लेट, एक शुद्ध जल का लोटा, गंगा जल, धूप, घी का दीपक, हल्दी और सिन्दूर एकत्रित कर लें । तुलसी को प्रणाम करके अब जल अर्पण करे तथा इस मंत्र का उच्चारण करें

मंत्र का उच्चारण करके इन्हे सिन्दूर और हल्दी अर्पित करें । क्योकि ये इनका श्रृंगार है । इसके बाद तुलसी जी के समक्ष घी का दीपक और धुप जलाये । इसके बाद शालिग्राम और वृंदा देवी का ध्यान करते हुए तुलसी जी का जयकारा लगायें ।

तुलसी पूजा के मंत्र
तुलसी जी को जल चढाने का मंत्र
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

तुलसी जी का ध्यान मन्त्र
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

तुलसी की पूजा करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

धन-संपदा, वैभव, सुख, समृद्धि की प्राप्ति के लिए तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

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