नवरात्रि में कन्या पूजन का तरीका

नवरात्रि में 9 दिनों के बाद कन्या पूजन किया जाता है । कन्या पूजन करने से सभी तरह के वास्तु दोष, विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्रि में 9 दिनों के बाद कन्या पूजन किया जाता है । कन्या पूजन करने से सभी तरह के वास्तु दोष, विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

विशेष ध्यान रखने योग्य बात हे कि कन्या की उम्र 2 वर्ष से काम और 10 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए ।

1. शास्त्रों के मतानुसार 2 वर्ष की कन्या को कुमारी कहा गया है । कुमारी के पूजन से सभी तरह के दुख और दरिद्रता का नाश होता है ।

2. 3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति का रूप मानते है । इस रूप के पूजन से धन की प्राप्ति होती है ।

4. चार वर्ष की कन्या को कल्याणी कहते है । कल्याणी के पूजन से सभी क्षेत्रों में सफलता और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है ।

5. पाँच वर्ष की कन्या को रोहिणी कहा गया है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने से घर परिवार में सुख शांति रहती है ।

6. छः वर्ष की कन्या को काली कहते है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है ।

7. सात वर्ष की कन्या को चंडिका कहते है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने से सुख, धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

8. आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी कहते है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने से कोर्ट कचहरी में विजय और कीर्ति की प्राप्ति है ।

9. नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा का स्वरुप का जाता है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने से सभी प्रकार की विघ्न बाद्दाओ का नाश होता है ।

9. दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा क स्वरुप माना जाता है । माता के इस स्वरुप की पूजा करने मनवांछित फल की प्राप्ति होती है ।

इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों तक प्रतिदिन माता स्वरुप कन्याओ को अपनी सामर्थ और श्रद्धा से भेंट देना अति शुभकारी और फलदायी मानते है । इन दिनों इन देवी स्वरुप कन्याओ को श्रृंगार सामग्री, फूल फल व खिलौने भेंट स्वरुप देकर माँ की असीम कृपा प्राप्त की जा सकती है ।

उपरोक्त लिखित रीतिओ के अनुसार माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करने से देवी माँ प्रसन्न होकर हमें धन, सुख, सौभाग्य और अदम्य वैभव का वरदान प्रदान करती है ।

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