Chaitra Navratri 8th day – माता महागौरी की पूजा विधि और आरती

Maa Mahagauri Ki Aarti

The 8th day of Navratri which falls in the Maha Ashtami Tithi is dedicated to the worship of Goddess Mahagauri and Kanya puja. She is known as the 8th and most beautiful form of NavDurga. It is believed that she is the most beautiful and glows very brightly. That’s the reason her name is Gauri. She is the Goddess who denotes peace and endurance.

Chaitra Navratri 8th day – माता महागौरी की पूजा विधि और आरती

Maa Mahagauri Ki Aarti

आज का दिन महा अष्टमी की रूप में मनाया जाता है। बंगाल में दुर्गा अष्टमी के रूप में जाना जाता है। नवरात्र के आठवा दिन मां महागौरी को समर्पित रहता है। इस दिन मां महागौरी की आराधना करने से एश्वर्य और सभी सुखों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि देवी महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी आराधना से पूर्व जन्मों के संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। देवी की पूजा कल्याणकारी होती है। माता गौरवर्णी है और इनके समस्त आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसलिए देवी महागौरी को श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है। माता चारभुजा धारी है। इनका वाहन वृषभ है। इसलिए देवी को वृषारूढ़ा भी कहा गया है।

माता महागौरी की पूजाविधि

माता महागौरी की पूजा प्रारंभ करने के लिए सबसे पहले पीले वस्त्र धारण करें। माता को कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेंहदी, अबीर, गुलाल, चूड़ियां, वस्त्र आदि समर्पित करें। फल, मेवे, मिष्ठान्न का भोग लगाएं। माता के सामने दीपक और 

मां महागौरी की आरती/Maa Mahagauri Ki Aarti

जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।
चंद्रकली और ममता अम्बे।
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।

 

 

 

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