बसंत पंचमी का महत्व , सरस्वती पूजा की कथा , पूजा विधि

बसंत पंचमी का महत्व , सरस्वती पूजा की कथा , पूजा विधि

आज ही के दिन से वसंत ऋतु की शुरूआत होती है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।लोग पीले रंग का वस्त्र पहन कर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। कुछ लोग बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहते हैं। इस दिन लोग खासकर छात्र-छात्रा विद्या की देवी सरस्वती की आराधना करते हैं. बच्चों की शिक्षा प्रारंभ करने या किसी नई कला की शुरुआत के लिए इस दिन को काफी शुभ माना जाता है।

बसंत पंचमी / सरस्वती पूजा मंत्र:

श्रद्धालु स्नान करने के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। अपने ठीक सामने पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वति की मूर्ति को उस पर स्थापित करें। जिसके बाद रोली मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि का प्रसाद मां के सामने अर्पित कर ध्यान में बैठ जाएं. मां सरस्वती के पैरों में श्वेत चंदन लगाएं। पीले और सफेद फूल दाएं हाथ से उनके चरणों में अर्पित करें और

सरस्वती पूजा मंत्र:

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप करें. शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजन करके उससे छुटकारा पाया जा सकता है।

सरस्वती पूजा की कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने मनुष्यों की योनी बनाई। एक समय की बात है वे एक दिन पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे, तो उन्होंने अपने द्वारा रचे गए सभी जीवों को देखा। उनको लगा कि पृथ्वी पर काफी शांति है। अभी भी कहीं कुछ कमी रह गई है। उसी समय उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला और धरती पर छिड़का, तभी वहां पर चार भुजाओं, श्वेत वर्ण वाली, हाथों में पुस्तक, माला और वीणा धारण किए हुए एक देवी प्रकट हुईं। ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम उनको वाणी की देवी सरस्वती के नाम से संबोधित किया और सभी जीवों को वाणी प्रदान करने को कहा। तब मां सरस्वती ने अपनी वीणा के मधुर नाद से जीवों को वाणी प्रदान की।

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